डाकिया बोल ऊठा वाह भाभी

Savita bhabhi, antarvasna: फोन पर मैं अपनी सहेली आकांक्षा से बात कर रही थी। आकांक्षा मुझसे अपना दर्द बयां कर रही थी वह कहने लगी मेरे पति तो अब मेरी तरफ देखते तक नहीं हैं। मैंने आकांक्षा को कहा तुम कुछ नया ट्राई करो और अपने पति के सामने अपने यौवन का प्रदर्शन करो तो तुम्हारे पति तुम्हे जरूर देखेंगे। आकांक्षा को मैंने सेक्स का पाठ पढ़ाया जब आकांक्षा का कुछ दिनों बाद मुझे फोन आया तो वह कहने लगी तुम बिल्कुल सही कहती थी मेरे पति तो आजकल मेरे पीछे पूरी तरीके से पागल हो चुके हैं मैंने कुछ दिनों पहले ही डिजाइनर लॉन्जरी मंगवाई उसमें जब मेरे पति ने मुझे देखा तो उनका लंड मुझे देख खड़ा होने लगा वह मुझे अपनी बाहों में लेते हुए कहने लगे आकांक्षा तुम तो आज भी पहले जैसे ही जवान हो यह कहते ही उन्होंने मेरी डिजाइनर लॉन्जरी को फाड़ फेका जिस प्रकार से उन्होंने मेरी चूत उठा उठा कर मारी मुझे मजा ही आ गया। यह सब तुम्हारी वजह से ही संभव हो पाया है सविता तुम बड़ी कमाल की हो। मैंने अपनी सहेली को कहा कभी तुम मुझे मिलने भी तो आया करो वह कहने लगी ठीक है मैं देखती हूं यदि मुझे समय मिला तो मैं तुमसे मिलने जरूर आऊंगी बच्चों से ही मुझे फुर्सत नहीं मिल पाती है।

वह मुझसे पूछने लगी तुम आजकल क्या कर रही हो? मैंने उसको बताया आजकल तो मेरे ससुर मुझे छोड़ते ही नहीं है ना जाने उन्हें ऐसा क्या हो गया है मुझे देखते ही वह कहते हैं बहू मेरे लंड को अपने मुंह में ले लो। मुझे भी उनके लंड को अपने मुंह में लेना पड़ता है जब भी मे उनके लंड को मुंह में लेती हू तो मुझे बड़ा मजा आता है। अच्छा तो आजकल तुम अपने ससुर के लंड को मुंह मे ले रही हो। मैंने आकांक्षा को कहा हां वह मेरे बदन के पीछे पागल है लेकिन आज भी उनके अंदर वही ताकत है। आकांक्षा ने मुझे कहा अभी तो मैं फोन रखती हूं मैं तुमसे बाद में बात करूंगी जैसे ही आकांक्षा ने फोन रखा था दरवाजा कोई बड़ी तेजी से खटखटा रहा था। मैं दरवाजे की तरफ गई मैंने देखा एक खाकी वर्दी में डाकिया खड़ा है वह मेरी तरफ देख रहा था। वह मुझे कहने लगा कि क्या यह रमेश सिन्हा का घर है? मैंने उस डाकिया को कहा हां यह रमेश सिन्हा का ही घर है वह मेरे पति हैं। वह मेरी तरफ ऊपर से लेकर नीचे तक देखते हुए कहने लगा भाभी जी आप दस्तखत कर दीजिए।

उसने मुझे एक कागज निकाल कर दिया मैंने उस पर दस्तखत किए मैंने उस से पूछ लिया तुम मेरी तरफ ऐसे क्यो देख रहे थे? वह मुझे कहने लगा भाभी आपको देख कर मुझे ऐसा लग रहा है कुछ देर आपके साथ समय बिताना चाहिए। मैंने डाकिया को कहा तुम अंदर आ जाओ वह अंदर आ गया। मैंने उससे पूछा क्या तुम पानी लोगे? वह कहने लगा हां आप मुझे ठंडा पानी पिला दीजिए बाहर गर्मी बड़ी हो रही है। मैंने उसे पानी पिलाया वह कहने लगा भाभी आपके हाथ कितने कोमल हैं क्या मैं आपके हाथों को छू सकता हूं? मैंने उसे कहा हां क्यों नहीं जब उसने मेरे हाथों को छुआ तो उसके इरादे मुझे समझ आ गए थे वह मेरी चूत मारना चाहता था मैंने उसे कहा तुम मुझे चोदना चाहते हो? वह मेरी तरफ देखने लगा वह कहने लगा आप मुद्दे की बात करती हैं। मैंने उसे कहा मुझे बेवजह की बातों को इधर से उधर घुमाना पसंद नहीं है जिसमें कि तुम अपना समय खराब करो और मेरा समय भी बर्बाद हो। वह मेरी बात से प्रभावित हुआ उसने मुझे अपनी गोद में बैठाया जब उसने मुझे अपनी गोद में बैठाया तो उसका मोटा लंड मेरी गांड से टकरा रहा था वह मुझे कहने लगा भाभी जी आप बड़ी कमाल की हैं मैं तो यह सोच रहा हूं आपके पति आपकी चूत मारते होंगे तो उन्हें तो बड़ा मजा आता होगा। मैंने उसे कहा मेरे पति जब मुझे चोदते है तो उनको बड़ा मजा आता है फिलहाल तो मुझे इस वक्त लग रहा है तुम मेरी चूत जल्दी से मारो कहीं कोई आ ना जाए। डाकिया कहने लगा ठीक है भाभी मैं आपकी चूत मारता हूं डाकिया ने मेरे सूट को खोला जब वह मेरी पिंक कलर की ब्रा को उतार रहा था तो वह मेरी तरफ देखते हुए कहने लगा भाभी जी आपका गोरा बदन देख कर मुझे बड़ा अच्छा लग रहा है। मैंने उसे कहा मुझे भी आज कुछ नया करने का मौका मिलेगा तुम्हारी आज किस्मत बड़ी अच्छी है मेरा मूड बहुत सही है।

डाकिया मेरी तरफ देखते हुए कहने लगा भाभी जी आपकी ब्रा के हुक को खोल दिया है मैं आपके स्तनों का रसपान करना चाहता हूं? मैंने भी उसे इजाजत दी उसने मेरे स्तनो को अपने मुंह में लिया जैसे ही उसने अपनी जीभ को मेरे स्तनो पर स्पर्श करना शुरू किया तो मुझे भी अच्छा लग रहा था वह मेरे स्तनों को बड़े अच्छे से चूस रहा था। उसके अंदर इतनी ज्यादा उत्तेजना बढ़ गई उसने मेरे स्तनो पर जोरदार तरीके से अपने दांत के निशान मारे मैंने उसे कहा लगता है तुम्हारे अंदर कुछ ज्यादा ही गर्मी पैदा हो गई है। वह मुझे कहने लगा भाभी जी आप जैसी कमाल की महिला को देखकर भला किस के अंदर गर्मी पैदा नहीं होगी उसने मेरे स्तनों पर जगह-जगह अपने प्यार की निशानी छोड़ दी थी। मैंने उसे कहा तुम अपने लंड को मुझे दिखाओ उसने भी मुझे अपने लंड को दिखाया मैंने उससे कहा तुम्हारा लंड बडा मोटा है। उसने मुझे कहा भाभी जी आप मेरे लंड को अपने हाथों में ले लीजिए मैंने अपने हाथों मे उसके लंड को लिया मेरा मन उसे चूसने का होने लगा। मैंने उसके लंड को अपने मुंह के अंदर लेकर चूसना शुरू किया मुझे बड़ा आनंद आने लगा वह मुझे कहने लगा भाभी ऐसे ही चूसते रहिए।

मैंने उसके लंड को बहुत देर तक चूसा वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुका था वह मुझे कहने लगा भाभी जी कसम से मजा आ रहा है। उसने अपने लंड को मेरे मुंह से बाहर निकालते हुए मेरे स्तनों के बीचो-बीच रगड़ना शुरू किया उसने मेरी उत्तेजना को भी बढ़ा दिया। उसने जब मेरे सलवार के नाडे को खोलकर मेरी चूत को अपने मुंह में लेकर चाटना शरू किया मैं अपने आपको रोक ना सकी मैंने उसे बिस्तर पर लेटा दिया उसका लंड तन कर खड़ा हो चुका था। मैंने जैसे ही अपने दोनों पैरों को खोल कर उसके लंड को अपनी चूत मे लिया उसका लंड मेरी चूत के अंदर तक चला गया था वह कहने लगा भाभी आपने तो मेरे लंड में दर्द कर दिया है। मैंने उसे कहा लेकिन तुम्हारा लंड मेरी चूत के अंदर जा चुका है अब तुम्हारी बारी कि तुम कैसे मुझे चोदते हो। वह इस बात से बड़ा खुश हुआ उसने मुझे कस कर पकड़ा मै अपनी चूतड़ों को ऊपर नीचे कर रही थी वह मुझे तेजी से धक्के मार रहा था। उसके अंडकोष मेरी चूतड़ों पर टकराते उस से एक अलग ही आवाज पैदा होती हम दोनों ही अब एक दूसरे की गर्मी को ज्यादा देर तक झेल नहीं पाए। जब उसका वीर्य पतन होने वाला था तो उसने मुझसे कहा आप मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर ले लीजिए मैंने उसके लंड को अपने मुंह में लेकर बहुत देर तक चूसा उसके वीर्य को मैंने अपने अंदर ही निगल लिया लेकिन मेरी चूत की खुजली अभी तक मिटी नहीं थी। मैंने उससे कहा तुम्हे मेरी खुजली मिटाना पड़ेगी उसने भी अपने लंड को पूरी तरीके से खड़ा कर लिया उसने मेरी चूतडो को कसकर पकड़ते हुए मेरी चूत के अंदर धक्के देना शुरू किया तो ससुर जी ने आवाज सुन ली वह बाहर आए और कहने लगे सविता तुम अपनी चूत डाकिया से कैसे मरवा रही हो? मैंने बाबू जी को कहां आप अभी कमरे में चले जाइए मुझे लंड को अपनी चूत में लेने दीजिए बाबू जी अपने कमरे में चले गए क्योंकि उन्हें पता था यदि मैं नाराज हो जाऊंगी तो उन्हें भी मजा नहीं दूंगी। डाकिया मेरी चूत के अंदर बाहर लंड को कर रहा था उसने मेरी चूत से खून बाहर निकाल दिया था 10 मिनट की चुदाई के बाद जब डाकिया का वीर्य मेरी चूत के अंदर गिरा तो मैं खुश हो गई। डाकिया मुझे कहने लगा भाभी जी अब मैं चलता हूं उसने अपने कपड़े पहने और वह चला गया लेकिन मुझे बड़ा मजा आया जिस प्रकार से मैं डाकिए के लंड को अपनी चूत में लेती रही उसके बाद मैंने बाबूजी को भी खुश कर दिया था उन्हें भी कोई शिकायत ना रह जाए।