गांड मरवाकर ननद का जीवन बर्बाद होने से बचाया

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मेरा नाम सविता है, मैं नोएडा की रहने वाली हूं नोएडा में मेरे बड़े ही जलवे हैं सब लोग मुझे ही देखते हैं। मुझे यह पता है कि मेरी गांड बहुत ज्यादा बड़ी है इसलिए मैं जहां से भी गजरती हूं वहां पर सब लोग एक नजर तो मुझ पर मारते ही हैं। मैंने कई लंड अपनी गांड में ले लिया है लेकिन मेरे पति का कडक लंड मुझे बड़ा अच्छा लगा है इसीलिए मैंने  उनसे 2 साल पहले शादी कर ली वह हर दिन मेरी गांड मारता है और हमेशा ही कोई नए तरीके से मेरी गांड के मारते है। मैंने अपने पति को पहले ही कह दिया था कि मैं बड़े खुले विचारों के हूं इसलिए मैं बिल्कुल भी बंदिश मैं नहीं रह सकती। इसी वजह से जब भी मेरे आशिको का मुझे फोन आता है तो मेरे पति मुझे कभी नहीं रोकते। वह कहते हैं जाओ तुम उनकी इच्छा पूरी कर दो मैं भी अपनी अदाओं से सबको अपने बस में कर लेती हूं और ना जाने मेरे कितने आशिक हैं जो कि मेरी नीली नीली आंखों में फस चुके हैं और मेरी गांड के प्यासे हैं। मैं बहुत ज्यादा खुश रहती हूं क्योंकि वह लोग मेरी गांड की प्यास बुझा देते हैं।

मुझे अलग अलग लंड अपनी गांड मे लेने में बड़ा मजा आता है। मैं अपने पति से हमेशा कहती हूं जब भी तुम्हारे दोस्तों का मन हुआ करे तो तुम उन्हें मेरे पास ले आया करो मैं उनकी इच्छा पूरी कर दिया करूगी। मेरे पति के जितने भी दोस्त है जब भी वह हमारे घर पर आते हैं तो वह सब बड़े ही खुश होकर जाते हैं। वह सब कहते हैं सविता भाभी का तो जवाब ही नहीं है वह लोग मेरे यौवन का रसपान करते है। वह मेरे पति को हमेशा ही कहते हैं तुम्हें तो एक माल मिली है तुम बड़े ही खुशनसीब हो काश हमें भी ऐसी पत्नी मिली होती। मेरे पति हमेशा ही अपने दोस्तों से कहते हैं कि मैंने भी सविता के पीछे कम पापड़ नहीं बेले है कई पापड़ बेलने के बाद सविता ने मुझे हां कहा था। मैने अपनी गांड पर बडे लटठ खाए थे सविता के पिताजी पुलिस में है उन्होंने अपने लटठ पर तेल लगाकर मुझे बड़े अच्छे से मारा आज तक मेरी गांड पर उनके लटठ के निशान पड़े हुए हैं।

एक बार मेरी ननद घर आ गई वह घर आकर बड़ी तेजी से रोने लगी। मैंने उसे पूछा तुम्हें क्या हो गया तुम इतन रो रही हो। मेरे ननद कहने लगी मेरा मेरे पति संजीव के साथ झगड़ा हो गया है। मैंने उसे कहा इसमें रोने वाली कौन सी बात है क्या तुम अपने पति को अपने यौवन का सुख नहीं दे पा रही हो या फिर कोई और बात है। मेरे ननद कहने लगी मेरे पति मेरे यौवन का पूरा सुख भोग रहे हैं और मेरी चूत हमेशा ही मारते हैं उसके बावजूद भी वह मुझसे बिल्कुल भी खुश नहीं है और ना जाने उन्हें क्या चीज चाहिए जिससे वह खुश हो जाएऐ। मेरे पति भी कुछ देर बाद आ गए और वह हमारे साथ ही बैठे हुए थे मेरे पति हमारे साथ बैठ गए। उन्होंने मेरी ननद से पूछा  रोशनी तुम घर क्यों चली आई क्या फिर से तुम्हारा और  तुम्हारे पति का झगड़ा हुआ है। मेरी ननद ने मेरे पति को सारी बात बताई।  मेरे पति ने रोशनी से कहा तुम्हें अपने पति को समझाना चाहिए। मेरी ननद ने कहा मैंने अपने पति को समझाया पर वह हमेशा ही मुझसे झगड़ा करते हैं। मेरे पति गुस्सा हो गए और मुझे कहने लगे रोशनी क्यों संजीव के साथ बात करे उसने तो अपना पूरा जीवन ही उसके नाम कर दिया है और वह उसे सुख भी दे रही है उसके बावजूद भी संजीव खुश नहीं है तुम्हें ही उससे चलकर एक बार बात करनी चाहिए। मेरे पति कहने लगे मेरे पास तो वक्त नहीं है लेकिन तुम संजीव से एक बार मिलो और तुम ही उसे समझा दो। रोशनी कहने लगी भाभी आप ही उसको समझा दो, आपकी बात को तो कोई भी मना नहीं करता आपने तो बहुतो को ठीक कर दिया है तो संजीव क्या चीज है। मैं मन ही मन सोचने लगी संजीव देखने में बुरा तो नहीं है उसके साथ भी मैं सेक्स कर लूं तो मुझे अच्छा लगेगा। मैंने अपनी ननद से कहा चलो हम लोग कल तुम्हारे ससुराल चलते हैं और वही जाकर हम संजीव से बात कर लेते हैं। मेरे पति भी कहने लगे सविता तुम चली जाओ तुम अपने तरीके से संजीव से बात कर लेना और उसे समझा देना। मैंने अपने पति से कहा ठीक है मैं कल चली जाऊंगी तुम उसकी बिल्कुल भी चिंता मत करो। मेरे ननद और मेरे पति दोनों ही निश्चिंत थे क्योंकि उन्हें पता था जब भी मैंने किसी से बात की है तो उसने मेरी बात को मना नहीं किया। मैंने अगली दिन पटियाला सूट और सलवार पहन लिया जिसमें की मैं एक नंबर की आइटम लग रही थी।

मेरे पति मुझे देखते हुए कहने लगे लगता है आज तुम किसी को अपने यौवन में फंसा कर ही रहोगी। मैंने अपने पति से कहा कि यौवन में तो मैंने तुम्हें फंसा लिया था अब तुम ही मुझे छेड रहे हो। मेरे पति कहने लगे ठीक है तुम जाओ मैं भी कुछ देर बाद निकलता हूं और तुमसे बाद में ही बात करूंगा। मैं रोशनी के साथ उसके ससुराल चली गई जब मैं उसके ससुराल में गई तो उसके मोहल्ले के सारे लौंडे मुझे घूर कर देख रहे थे और मैं उनकी नजरों में अपने लिए एक प्यार देख रही थी मुझे लगा गया था उनके लंड से पानी निकल चुका है और वह सब मेरे बडी बडी गांड की तरफ देख रहे थे। मैं जब संजीव के घर गई तो संजीव की मां बाहर खाट लगा कर बैठी हुई थी वह बड़ी ही बदतमीज औरत है। उसने हम दोनों को देखा तो वह गाली बकने लगी मैंने भी उस बुढ़िया को कहा रंडी तुम चुप हो जाओ नही तो तेरी गांड में आज ही डंडा घुसा दूंगी वह कुत्तिया चुपचाप अपने कमरे में चली गई क्योंकि मैंने उसे अपने तरीके से समझा दिया था। संजीव जब मुझे मिला तो कहने लगा सविता भाभी आप क्यों आ गई। मैंने उसे कहा कि तुम्हारे काम ही ऐसे हैं इसलिए मुझे आना पड़ा।

हम तीनो ही साथ में बैठे हुए थे संजीव मुझे अपनी प्यासी नजरो से देख रहा था। मुझे यह तो समझ आ चुका था संजीव भी मुझसे कुछ चाहता था। मैंने रोशनी से कहा तुम एक काम करो तुम अपनी सास के साथ बैठ जाओ मैं और संजीव बात कर रहे है उसके बाद हम लोग तुमसे मिलते हैं। जब रोशनी चली गई तो मैंने संजीव के हाथ को पकड़ लिया और उसके हाथ को बड़ी जोर से दबा दिया। मैंने उससे पूछा कि क्या तुम्हें रोशनी अपने यौवन का सुख नहीं दे पा रही है। वह कहने लगा भाभी नहीं वह मुझे अपनी गांड नहीं मरने देती मुझे बहुत गुस्सा आता है। मैंने संजीव से कहा बस इतनी सी बात है? तुम्हें गांड मारनी है संजीव कहने लगा मुझे गांड मारनी है।

मैंने संजीव से कहा तुम दरवाजे को बंद कर लो और सरसों के तेल अपने लंड पर अच्छे से लगा लो। संजीव ने सरसों का तेल अपने लंड पर लगाया तो मैं बार बार उसको देख रही थी उसका लंड पूरा चिकना और मुलायम हो चुका था। मैंने उसके लंड को अपने हाथों से हिलाना शुरू कर दिया कुछ देर मैने उसे मुंह में लिया मैने उसका पानी गिरा दिया। मैने दोबारा से उसके लंड को खड़ा कर लिया और डॉगी स्टाइल में उसके सामने अपनी नंगी चूतडो को उसके सामने पेश किया। उसने भी मेरी मसालेदार गांड के अंदर जैसे ही अपने डंडे जैसे लंड को घुसाया तो मुझे बड़ा दर्द हुआ। वह मेरी चूतडो को कसकर पकड़ चुका था और बड़ी तेज मुझे धक्के दे रहा था। संजीव कहने लगा भाभी आपकी गांड तो बडी ही मसालेदार और गर्मागर्म है मुझे आपकी गांड मे  अपने लंड को डालकर बहुत  अच्छा महसूस हो रहा है मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मैं आपको सिर्फ धक्के देता रहु। मैंने संजीव से कहा मेरी मसालेदार गांड तुम्हारे लिए है तुम्हारा जब भी मन हो तब तुम मेरे गांड मार लिया करना। संजीव बड़ी तेजी  से मेरी गांड मार रहा था मेरी गांड से धुंआ निकलने लगा। मैंने संजीव से कहा कि तुम्हारे अंदर क्या ताकत नहीं है और भी तेज तेज मुझे झटके मारो जिससे कि तुम्हारा लंड मेरी गांड के अंदर तक चला जाए। संजीव ने बड़ी तेजी से मुझे झटके मारे जैसे ही उसका वीर्य मेरी गांड के अंदर तेजी से गिरा तो संजीव कहने लगा सविता भाभी आपकी मसालेदार और गरमा गरम गांड मारने में मजा आ गया आज के बाद में कभी भी रोशनी को अकेले नहीं भेजूंगा वह जब भी आपसे मिलने आएगी तो मैं भी उसके साथ ही आऊंगा। वह मुझसे बहुत ही प्रभावित हो गया और जब भी संजीव का मन होता तो मेरी गांड मारने आ जाया करता। मेरी ननद का घर टूटने से बच चुका था वह भी बहुत खुश हो गई थी।