नए प्रेमी युगल की सुलह करवाई

Savita bhabhi xxx, xxx hindi story: पड़ोस में रहने वाला नवविवाहित जोड़ा जो कुछ दिनों पहले ही शादी के बंधन में बंधा था लेकिन उन दोनों की शादी के बीच में दरार आने लगी थी। हमारे उनके परिवार के साथ अच्छे संबंध हैं इसलिए मैं जब मिश्रा जी के घर पर गई तो मिश्रा जी उस वक्त कहीं गए हुए थे, मैंने देखा संजीव और उसकी पत्नी रेखा आपस में झगड़ा कर रहे हैं। उन दोनों ने जब मुझे देखा तो वह शांत हो गए। रेखा मेरे पास आकर बैठी मैंने रेखा से पूछो रेखा ने मुझे कहा सविता भाभी अब आपको क्या बताऊं संजीव और मेरे बीच रिश्ते ठीक नहीं है। मैंने रेखा को कहा तुम चिंता मत करो तुम्हारे बीच सब कुछ ठीक हो जाएगा मैंने रेखा को आश्वासन दिया मैंने रेखा से कहा रेखा तुम कुछ देर के लिए बाहर हो आओ मैं संजीव को इस बारे में समझाती हूं। रेखा भी मेरी बात मान गई उसने अपनी सहेली को फोन किया वह अपनी सहेली के साथ मूवी देखने के लिए चली गई। संजीव मेरे पास आकर बैठा संजीव ने मुझसे कहा सविता भाभी रेखा कहीं नजर नहीं आ रही? मैंने संजीव को कहा रेखा अपनी सहेली के साथ गई हुई है संजीव मेरी तरफ देख कर कहने लगा लेकिन वह मुझे बिना बताए ही कैसे चली गई।

मैंने संजीव को कहा तुम मेरे पास आकर बैठ जाओ वह मेरे पास आकर बैठा मैंने उससे कहा तुम दोनों के बीच के रिश्ते क्या ठीक नहीं है? संजीव मुझे कहने लगा भाभी अब आपको क्या बताऊं जब भी मैं रेखा से कुछ पूछता हूं तो वह मेरी बातों का जवाब ही नहीं दिया करती अब आप ही मुझे बताइए क्या यह सब ठीक है, मैं रेखा की हर एक जरूरतों को पूरा करता हूं लेकिन उसके बावजूद भी रेखा मुझसे प्यार नहीं करती। मैंने संजीव को कहा तुम इस बात को भूल कर अब आगे बढ़ने की कोशिश करो तुम्हारे पास सब कुछ तो है तुम्हें किस चीज की कमी है। संजीव मुझे कहने लगा हां भाभी मेरे पास सब कुछ तो है लेकिन मेरी पत्नी के साथ ही मेरे अच्छे संबंध नहीं है। मैंने संजीव के कंधे पर हाथ रखा संजीव ने मेरी तरफ देखा संजीव मेरी तरफ देख रहा था मैं भी संजीव की आंखों में आंखें डाल कर देख रही थी।

संजीव ने जब मेरी जांघ पर हाथ रखा मैंने संजीव को कहा संजीव कहीं तुम्हें रेखा प्यार का सुख नहीं दे पा रही है? संजीव मेरी तरफ देखने लगा संजीव मेरे स्तनों को दबाने लगा मैंने संजीव से कहा तुम मेरे स्तनों का रसपान करोगे? वह मुझे कहने लगा हां सविता भाभी आप मुझे अपने स्तनों का रसपान करवा दीजिए। जब मैंने अपने कपडो को संजीव के सामने उतारो तो संजीव मेरी तरफ देख रहा था उसने मेरे स्तनों को अपने हाथों में लेकर दबाना शुरू किया। जब वह मेरे स्तनों को दबाता तो मेरे अंदर की उत्तेजना भी बढ़ती चली जाती जब उसने मेरे स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया तो उसे बड़ा मजा आने लगा और मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था काफी देर तक उसने मेरे स्तनों का रसपान किया। जब उसने अपनी जीभ को मेरी चूत पर लगाना शुरू किया तो मैंने संजीव को कहा जब तुम कॉलेज में जाया करते थे तो मैं तुम्हारी तरफ देखा करती थी मैं सोचती थी कि तुम कितना ज्यादा सीधे लड़के हो लेकिन तुम तो एक नंबर के चोदू निकले। संजीव ने अपने लंड को बाहर निकाला वह कहने लगा भाभी मैंने भी आपके बदन को ना जाने कितने बार देखा लेकिन आपने तो कभी मेरी तरफ देखा नहीं। मैंने उसे कहा यह बातें छोड़ो तुम अपने लंड को मेरे मुंह के अंदर डालो। संजीव ने अपने मोटे लंड को मेरे मुंह के अंदर डाला मैं उसके लंड को अच्छे से चूसने लगी मैंने जब उसके लंड को अपने गले के अंदर तक उतार चूसना शुरू किया तो संजीव मुझे कहने लगा भाभी आप वाकई में लाजवाब है आप जिस प्रकार से मेरे लंड का रसपान कर रही है मुझे तो बड़ा मजा आ रहा है आप ऐसे ही मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर तक लेते रहिए मुझे भी मजा आएगा। मैंने संजीव के लंड को अपने गले के अंदर तक ले लिया और काफी समय तक मैं उसके मोटे लंड का स्वाद चखती रही अब वह भी पूरी तरीके से उत्तेजना में आ चुका था। उसने मेरे दोनों पैरों को चौड़ा किया मेरी मुलायम चूत मे उंगली डलाना शुरू किया मेरी चूत से भी पानी बाहर की तरफ निकल रहा था मेरी चूत पर जैसे ही वह अपनी जीभ को लगाता तो मुझे बड़ा मजा आता और मेरी चूत से निकलते हुए गर्म पानी को वह अपने मुंह में अंदर तक लेकर अच्छे से चूस रहा था मुझे भी बड़ा अच्छा लग रहा था।

बहुत देर तक हम दोनों एक दूसरे की गर्मी को ऐसे ही बुझाते रहे अब हम दोनों की उत्तेजना पूरी तरीके से चरम सीमा पर पहुंच चुकी थी मेरी चूत भी संजीव के लंड का बेसब्री से इंतजार कर रही थी किस प्रकार से वह अपने लंड को मेरी चूत के अंदर प्रवेश करवाएगा। संजीव ने भी अपने लंड को हिलाया उसने अपने लंड पर थूक को लगाते हुए जैसे अंदर की तरफ प्रवेश करवाया तो मैं चिल्लाने लगी धीरे-धीरे संजीव का लंड मेरी चूत के अंदर तक जाने लगा था जब उसका लंड मेरी चूत के अंदर घुसा तो मेरे मुंह से हल्की सी चीख निकली और उसी के साथ संजीव ने मुझे कस कर पकड़ लिया। उसने मेरे पूरे बदन को अपनी बाहों में जकड़ लिया था वह मुझे कहने लगा सविता भाभी आपके गदराए बदन को देखकर तो मेरा माल बाहर की तरफ को आने लगा है। मैंने उसे कहा अब तुम पूरी ताकत के साथ मेरी चूत पर प्रहार करो। संजीव का लंड मेरी चूत की दीवार से टकरा रहा था और उसके अंडकोष मेरी चूत से जब टकराते तो मेरे अंदर की गर्मी और भी ज्यादा बढ़ जाती।

संजीव मेरे दोनों पैरों को खोल कर मुझे पूरी तरीके से धक्के मारता जिस प्रकार से वह मेरी चूत पर अपने लंड का प्रहार कर रहा था उससे मैं बहुत ज्यादा गरम हो गई थी और संजीव भी खुश हो गया था। संजीव ने मुझे कहा भाभी मेरा लंड आपकी चूत के अंदर जा रहा है तो मुझे बड़ा अच्छा लग रहा है। मैं इस बात से बहुत ज्यादा खुश थी संजीव के साथ में मजा कर पा रही हूं संजीव ने भी मेरी चूत के मजा बहुत देर तक लिए वह अपने लंड को मेरी चूत के अंदर बाहर करता उससे मेरी चूत का रंग लाल हो चुका था। संजीव मुझे कहने लगा भाभी मेरा वीर्य आपकी चूत के अंदर गिरने वाला है मैंने उससे कहा कोई बात नहीं संजीव तुम अपने वीर्य को मेरी चूत में गिरा दो। संजीव ने जब अपने वीर्य को मेरी चूत के अंदर गिराया तो मैंने संजीव को कहा संजीव आगे से तुम कभी रेखा के साथ झगड़ा मत करना यदि तुम रेखा के साथ झगड़ा करोगे तो मैं तुम्हें अपने बदन के गर्मी का एहसास कभी नहीं करवाऊंगी। संजीव मुझे कहने लगा भाभी आप मुझे ऐसा सुख देती रहिएगा तो भला मैं क्यों रेखा से झगड़ा करने लगा। संजीव मेरी बात से सहमत था हम दोनों साथ में बैठे हुए थे और रेखा भी घर लौट आई। जब रेखा घर लौटी तो संजीव ने रेखा को गले लगाते हुए कहा रेखा मुझे माफ कर दो आज के बाद कभी भी मैं तुमसे झगड़ा नहीं करूंगा। मैंने उन दोनों के शादीशुदा जीवन को तो खुशहाल बना ही दिया था मेरी वजह से उन दोनों के रिश्ते भी अब सुधरने लगे थे हालांकि मेरा भी उसमें स्वार्थ था क्योंकि संजीव का मोटा लंड मेरी चूत में भी तो जाया करता था संजीव जिस प्रकार से मेरे बदन की गर्मी के मजे लिया करता उससे तो उसे भी बड़ा मजा आता और मैं भी खुश हो जाया करती। रेखा जब भी मेरे पास आती तो मै उस से जरूर पूछा करती थी संजीव तुम्हारा ध्यान तो रखता है? रेखा मुझे कहती हां भाभी वह मेरा बहुत ध्यान रखता है यह सब आपकी वजह से ही हुआ है। रेखा अपने प्रेमी के साथ खुश थी इस बात से संजीव को कोई आपत्ति भी नहीं थी संजीव और मैं एक दूसरे के साथ रंगरलिया मना कर खुश हो जाया करते।